उद्योगपर्व — गान्धारी-उपदेशः
Udyoga Parva — Gandhārī’s Counsel to Duryodhana
तत्र कार्यमहं मनन््ये कालप्राप्तमरिंदमा: । क्रियमाणे भवेच्छेयस्तत् सर्व शूणुतानघा:,'शत्रुओंका दमन करनेवाले निष्पाप कौरवो! इस विषयमें मैंने समयोचित कर्तव्यका निश्चय कर लिया है, जिसका पालन करनेपर सबका भला होगा। वह सब मैं बता रहा हूँ, आपलोग सुनें
तत्र कार्यमहं मन्ये कालप्राप्तमरिंदमाः । क्रियमाणे भवेच्छ्रेयो तत्सर्वं शृणुतानघाः ॥
वैशम्पायन उवाच