Gālava Completes the Horse-Gift: Garuḍa’s Counsel and Viśvāmitra’s Acceptance (गालव-विष्वामित्र-सम्बन्धः)
श्रुतवानस्मि ते वाक्यं यथा वदसि गालव । विधिस्तु बलवान ब्रद्मन् प्रवणं हि मनो मम,“विप्रवर गालव! आप जैसा कहते हैं, वे सब बातें मैंने सुन लीं। परंतु विधाता प्रबल है। मेरा मन इससे संतान उत्पन्न करनेके लिये उत्सुक हो रहा है
śrutavān asmi te vākyaṃ yathā vadasi gālava | vidhis tu balavān brahman, pravaṇaṃ hi mano mama ||
उशीनर उवाच—श्रुतवानस्मि ते वाक्यं यथा वदसि गालव । विधिस्तु बलवान् ब्रह्मन् प्रवणं हि मनो मम ॥
नारद उवाच