Udyoga Parva, Adhyaya 104: Nārada on Suhṛt and Nirbandha; the Viśvāmitra–Gālava Exemplum Begins
तदलं ते विरोधेन शमं गच्छ नृपात्मज । वासुदेवेन तीर्थेन कुलं रक्षितुमहसि,अतः राजकुमार! इस विरोधसे तुम्हें कुछ मिलनेवाला नहीं है। पाण्डवोंके साथ संधि कर लो। भगवान् श्रीकृष्णको सहायक बनाकर इनके द्वारा तुम्हें अपने कुलकी रक्षा करनी चाहिये
tad alaṁ te virodhena śamaṁ gaccha nṛpātmaja | vāsudevena tīrthena kulaṁ rakṣitum arhasi ||
तदलं ते विरोधेन शमं गच्छ नृपात्मज। वासुदेवेन तीर्थेन कुलं रक्षितुमर्हसि॥
कण्व उवाच