Vṛtra’s Cosmic Threat, Viṣṇu’s Upāya, and the Conditional Vulnerability
Udyoga-parva 10
समर्थों हाभवं पूर्वमसमर्थो5स्मि साम्प्रतम् । कथं नु कार्य भद्ठं वो दुर्धर्ष: स हि मे मत:,पहले मैं सब प्रकारसे सामर्थ्यशाली था; किंतु इस समय असमर्थ हो गया हूँ। आपलोगोंका कल्याण हो। बताइये, कैसे क्या काम करना चाहिये? मुझे तो वृत्रासुर दुर्जय प्रतीत हो रहा है
समर्थोऽहं भवँ पूर्वम् असमर्थोऽस्मि साम्प्रतम् । कथं नु कार्यं भद्रं वो दुर्धर्षः स हि मे मतः ॥
इन्द्र उवाच