शोक-शमन उपदेशः
Instruction on the Pacification of Grief
येन प्रत्यवगच्छेयु: कुलरूपविशेषणम् | कस्मादन्योन्यमिच्छन्ति विप्रलब्धधियो नरा:,जब दिद्वान्-मूर्ख, धनवान् और निर्धन सभी श्मशान-भूमिमें जाकर निश्चिन्त सो जाते हैं, उस समय उनके मांसरहित नाड़ियोंसे बँधे हुए तथा अस्थिबहुल अंगोंको देखकर क्या दूसरे लोग वहाँ उनमें कोई ऐसा अन्तर देख पाते हैं, जिससे वे उनके कुल और रूपकी विशेषताको समझ सकें; फिर भी वे मनुष्य एक-दूसरेको क्यों चाहते हैं? इसलिये कि उनकी बुद्धि ठगी गयी है
yena pratyavagaccheyuḥ kularūpaviśeṣaṇam | kasmād anyonyam icchanti vipralabdhadhiyo narāḥ ||
येन प्रत्यवगच्छेयुः कुलरूपविशेषणम् । कस्मादन्योन्यमिच्छन्ति विप्रलब्धधियो नराः ॥
विदुर उवाच