Vāmadeva’s Rājadharma: Norm-Setting, Counsel, and the Prevention of Rāṣṭra-Vināśa (वामदेव-प्रोक्तं राजधर्मम्)
एवमेतैर्गुणैर्युक्तो यो5नुरज्यति भूमिपम् । भर्तुरर्थेष्वप्रमत्तं नियुज्यादर्थकर्मणि,इसी प्रकार जिसमें वे सब गुण मौजूद हों, जो राजाको प्रसन्न भी रख सकता हो तथा स्वामीका कार्य सिद्ध करनेके लिये सतत सावधान रहता हो, उसको धनकी व्यवस्थाके कार्यमें लगावे
एवमेतैर्गुणैर्युक्तो योऽनुरज्यति भूमिपम् । भर्तुरर्थेष्वप्रमत्तं नियुज्यादर्थकर्मणि ॥
वामदेव उवाच