Adhyāya 90 — Protection of Livelihoods, Brahmanical Subsistence Norms, and Royal Oversight (राष्ट्रवृत्ति-राष्ट्रगुप्ति-उपदेशः)
कृषिगोरक्ष्यवाणिज्यं लोकानामिह जीवनम् | ऊर्ध्व॑ चैव त्रयी विद्या सा भूतान् भावयत्युत,खेती, पशुपालन और वाणिज्य--ये तो इसी लोकमें लोगोंकी जीविकाके साधन हैं; परंतु तीनों वेद ऊपरके लोकोंमें भी रक्षा करते हैं। वे ही यज्ञोंद्वारा समस्त प्राणियोंकी उत्पत्ति और वृद्धिमें हेतु हैं
bhīṣma uvāca |
kṛṣigorakṣyavāṇijyaṁ lokānām iha jīvanam |
ūrdhvaṁ caiva trayī vidyā sā bhūtān bhāvayaty uta ||
भीष्म उवाच—कृषिगोरक्ष्यवाणिज्यं लोकानामिह जीवनम्। ऊर्ध्वं तु त्रयी विद्या रक्षति; सा यज्ञैर्भूतानि भावयति च पुष्णाति च।
भीष्म उवाच