Chapter 81: Trust, Allies, and the Qualifications of the King’s Artha-Secretary (अर्थसचिव)
यो न कामाद् भयाल्लोभात् क्रोधाद् वा धर्ममुत्सूजेत् । दक्ष: पर्याप्तवचन: स ते स्यात् प्रत्यनन्तर:,जो कीर्तिको प्रधानता देता है और मर्यादाके भीतर स्थित रहता है, जो सामर्थ्यशाली पुरुषोंसे द्वेघ और अनर्थ नहीं करता है, जो कामनासे, भयसे, लोभसे अथवा क्रोधसे भी धर्मका त्याग नहीं करता, जिसमें कार्यकुशलता तथा आवश्यकताके अनुरूप बातचीत करनेकी पूरी योग्यता हो, वही पुरुष तुम्हारा प्रधानमन्त्री होना चाहिये
yo na kāmād bhayāl lobhāt krodhād vā dharmam utsṛjet | dakṣaḥ paryāptavacanaḥ sa te syāt pratyanantaraḥ ||
यो न कामाद् भयाल्लोभात् क्रोधाद् वा धर्ममुत्सृजेत् । दक्षः पर्याप्तवचनः स ते स्यात् प्रत्यनन्तरः ॥
भीष्म उवाच