Śara-śayyā-sthita-bhīṣma-saṃvāda-prastāvaḥ
The Prelude to Questioning Bhīṣma on the Bed of Arrows
शयाने वीरशयने भीष्मे शान्तनुनन्दने । गाड़ेये पुरुषव्यात्रे पाण्डवै: पर्युपासिते,जनमेजयने पूछा--महामुने! धर्मात्मा, महापराक्रमी, सत्यप्रतिज्ञ, जितात्मा, धर्मसे कभी च्युत न होनेवाले महाभाग शान्तनुनन्दन गड्जाकुमार पुरुषसिंह देवव्रत भीष्म जब वीरशय्यापर सो रहे थे और पाण्डव उनकी सेवामें आकर उपस्थित हो गये थे, उस समय वीर पुरुषोंक उस समागमके अवसरपर, जब कि उभयपक्षकी सम्पूर्ण सेनाएँ मारी जा चुकी थीं, कौन-कौनसी बातें हुईं? यह मुझे बतानेकी कृपा करें
janamejaya uvāca | śayāne vīraśayane bhīṣme śāntanunandane | gāṅgeye puruṣavyāghre pāṇḍavaiḥ paryupāsite ||
जनमेजय उवाच—शयाने वीरशयने भीष्मे शान्तनुनन्दने, गाङ्गेये पुरुषव्याघ्रे पाण्डवैः पर्युपासिते; उभयपक्षसैन्येषु सर्वेषु हतेषु, तस्मिन् शोकगम्भीरे समागमे का वाक्यपरम्परा समभवत्? तन्मे शंस महामुने।
जनमेजय उवाच