सम्भक्ष्य सर्वभूतानि कृत्वा चैकार्णवं जगत् । बाल: स्वपिति यश्नैकस्तस्मै मायात्मने नम:,इस प्रकार सम्पूर्ण भूतोंका भक्षण करके जो इस जगत्के जलमय कर देते हैं और स्वयं बालकका रूप धारण कर अक्षयवटके पत्तेपर शयन करते हैं, उन मायामय बालमुकुन्दको नमस्कार है
सम्भक्ष्य सर्वभूतानि कृत्वा चैकार्णवं जगत् । बालः स्वपिति यश्चैकस्तस्मै मायात्मने नमः ॥
भीष्म उवाच