Kṛṣṇa’s Dhyāna and the Prompt to Question Bhīṣma (कृष्णध्यानं भीष्मप्रश्नप्रेरणा च)
/ भीकम (2 अमान षट्चत्वारिशो5 ध्याय: युधिष्ठिर और श्रीकृष्णका संवाद, श्रीकृष्णद्वारा भीष्मकी प्रशंसा और युधिष्ठिरको उनके पास चलनेका आदेश युधिछिर उवाच किमिदं परमाक्षूर्य ध्यायस्यमितविक्रम । कच्चिल्लोकत्रयस्यास्य स्वस्ति लोकपरायण,युधिष्ठिरे पूछा--अमितपराक्रमी, जगत्के आश्रयदाता पुरुषोत्तम! आप यह किसका ध्यान कर रहे हैं? यह तो बड़े आश्चर्यकी बात है! इस त्रिलोकीका कुशल तो है न? आप तो जाग्रतू, स्वप्न, सुषुप्ति--तीनों अवस्थाओंसे परे तुरीय ध्यानमार्गका आश्रय लेकर स्थूल, सूक्ष्म और कारण तीनों शरीरोंसे ऊपर उठ गये हैं। इससे मेरे मनको बड़ा आश्चर्य हो रहा है
Yudhiṣṭhira uvāca: kim idaṁ paramāścaryaṁ dhyāyasy amita-vikrama? kaccil loka-trayasyāsya svasti loka-parāyaṇa?
युधिष्ठिर उवाच—किमिदं परमाश्चर्यं ध्यायस्यमितविक्रम। कच्चिल्लोकत्रयस्यास्य स्वस्ति लोकपरायण॥
युधिछिर उवाच