युधिष्ठिरस्य राज्याभिषेकः | Yudhiṣṭhira’s Royal Consecration
उपवेश्य महात्मानं कृष्णां च द्रुपदात्मजाम् । जुहाव पावकं धीमान् विधिमन्त्रपुरस्कृतम्,भगवान् श्रीकृष्णकी आज्ञासे पुरोहित धौम्यजीने एक वेदी बनायी जो पूर्व और उत्तर दिशाकी ओर नीची थी। उसे गोबरसे लीपकर कुशके द्वारा उसपर रेखा की। इस प्रकार वेदीका संस्कार करके सर्वतोभद्र नामक एक चौकीपर बाघम्बर एवं श्वेत वस्त्र बिछाकर उसके ऊपर महात्मा युधिष्छिर तथा द्रुपदकुमारी कृष्णाको बिठाया। उस चौकीके पाये और बैठनेके आधार बहुत मजबूत थे। सुवर्णजटित होनेके कारण वह आसन प्रज्वलित अग्निके समान प्रकाशित हो रहा था। बुद्धिमान् पुरोहितने वेदीपर अग्निको स्थापित करके उसमें विधि और मन्त्रके साथ आहुति दी
upaveśya mahātmānaṃ kṛṣṇāṃ ca drupadātmajām | juhāva pāvakaṃ dhīmān vidhimantrapuraskṛtam ||
वैशम्पायन उवाच—महात्मानं नृपतिं कृष्णां च द्रुपदात्मजाम् उपवेश्य, धीमान् पुरोहितो विधिमन्त्रपुरस्कृतं पावकं जुहाव; यथाविधि मन्त्रैश्च हविर्भिरग्नौ सम्यगाहुतीरददात्।
वैशम्पायन उवाच