दानपात्रापात्र-निर्णयः / Determining Worthy Gifts, Recipients, and Permissible Food
ऑपन--#ह-< बक। ] अि्शशाड< ३-“लेष्मातकके वैद्यकमें अनेक नाम आये हैं, उनमेंसे एक नाम “द्विजकुत्सित” भी है। इससे सिद्ध होता है कि वह द्विजातिमात्रके लिये अभक्ष्य है। २-मदगु एक प्रकारके जलचर पक्षीका नाम है। सप्तत्रिशो5्ध्याय: व्यासजी तथा भगवान् श्रीकृष्णकी आज्ञासे महाराज युधिष्ठटिरका नगरमें प्रवेश युधिषछ्िर उवाच श्रोतुमिच्छामि भगवन् विस्तरेण महामुने । राजधर्मान् द्विजश्रेष्ठ चातुर्वर्ण्यस्य चाखिलान्,युधिष्ठिर बोले--भगवन्! महामुने! द्विजश्रेष्ठ! मैं चारों वर्णोके सम्पूर्ण धर्मोंका तथा राजधर्मका भी विस्तारपूर्वक वर्णन सुनना चाहता हूँ
Yudhiṣṭhira uvāca | śrotum icchāmi bhagavan vistareṇa mahāmune | rājadharmān dvijaśreṣṭha cāturvarṇyasya cākhilān ||
युधिष्ठिर उवाच— श्रोतुमिच्छामि भगवन् विस्तरेण महामुने । राजधर्मान् द्विजश्रेष्ठ चातुर्वर्ण्यस्य चाखिलान् ॥
युधिषछ्िर उवाच