नाग उवाच अहो कल्याणवृत्तस्त्वं साधु: सज्जनवत्सल: । अवाच्यस्त्व॑ महाभाग परं स्नेहेन पश्यसि,नागने कहा--महाभाग! आपका आचरण बड़ा ही कल्याणमय है। आप बड़े ही साधु हैं और सज्जनोंपर स्नेह रखते हैं। किसी भी दृष्टिसे आप निन्दनीय नहीं हैं; क्योंकि दूसरोंको स्नेहदृष्टिसे देखते हैं
नाग उवाच—अहो कल्याणवृत्तस्त्वं साधुः सज्जनवत्सलः। अवाच्यस्त्वं महाभाग परं स्नेहेन पश्यसि॥
नाग उवाच