Prāyaścitta-vidhāna: Tapas, Dāna, Vrata, and Proportional Expiation (प्रायश्चित्तविधानम्)
काष्टैराद्रैर्यथा वह्नलिरुपस्तीर्णो न दीप्यते । तपःस्वाध्यायचारित्रैरेवं हीन: प्रतिग्रही,'जैसे गीली लकड़ीसे ढकी हुई आग प्रज्वलित नहीं होती, उसी प्रकार तपस्या, स्वाध्याय तथा सदाचारसे हीन ब्राह्मण यदि दान ग्रहण कर ले तो वह उसे पचा नहीं सकता
kāṣṭhair ādrair yathā vahnir upastīrṇo na dīpyate | tapaḥsvādhyāyacāritraiḥ evaṁ hīnaḥ pratigrahī ||
काष्टैराद्रैर्यथा वह्निरुपस्तीर्णो न दीप्यते। तपःस्वाध्यायचारित्रैरेवं हीनः प्रतिग्रही॥
व्यास उवाच