अध्याय ३५१ — उञ्छवृत्ति-व्रतसिद्धेः मानुषस्य परमगतिः
Sūrya–Nāga Dialogue on the Perfected Gleaner-Ascetic
प्राप्ते प्रजाविसग्े वै सप्तमे पद्मसम्भवे । नारायणो महायोगी शुभाशुभविवर्जित:,“जब सातवें कल्पके आरम्भमें सातवीं बार ब्रह्माजीके कमलसे जन्म-ग्रहण करनेका अवसर आया, तब शुभ और अशुभसे रहित अमिततेजस्वी महायोगी भगवान् नारायणने सबसे पहले अपने नाभिकमलसे ब्रह्माजीको उत्पन्न किया। जब ब्रह्माजी प्रकट हो गये, तब उनसे भगवानने यह बात कही--
prāpte prajāvisarge vai saptame padmasambhave | nārāyaṇo mahāyogī śubhāśubhavivarjitaḥ ||
वैशम्पायन उवाच— प्राप्ते प्रजाविसर्गे वै सप्तमे पद्मसम्भवे । नारायणो महायोगी शुभाशुभविवर्जितः ॥
वैशम्पायन उवाच