Prāyaścitta and Contextual Non-Culpability (प्रायश्चित्त-निमित्त-अदोषवाद)
अनसूयुरध:शायी कर्म लोके प्रकाशयन् | पूर्णद्धादिशभिर्वर्षेब्रद्म॒हा विप्रमुच्यते,यदि किसीने ब्रह्महत्या की हो तो वह भिक्षा मागकर एक समय भोजन करे, अपना सब काम स्वयं ही करे, हाथमें खप्पर और खाटका पाया लिये रहे, सदा ब्रह्मचर्यव्रतका पालन करे, उद्यमशील बना रहे, किसीके दोष न देखे, जमीन पर सोये और लोकमें अपना पापकर्म प्रकट करता रहे। इस प्रकार बारह वर्षतक करनेसे ब्रह्महत्यारा पापमुक्त हो जाता है
an asūyur adhaḥśāyī karma loke prakāśayan | pūrṇadvādaśabhir varṣair brahmahā vipramucyate ||
अनसूयुरधःशायी कर्म लोके प्रकाशयन् । पूर्णद्वादशभिर्वर्षैर्ब्रह्महा विप्रमुच्यते ॥
व्यास उवाच