Śuka’s Guṇa-Transcendence and Vyāsa’s Consolation (शुकगति-वर्णनम्)
न वेद चक्षुश्नक्षुष्टवं श्रोत्रं नात्मनि वर्तते । इनमेंसे एक-एक इन्द्रियको न तो अपना ज्ञान है और न दूसरेका। नेत्र अपने नेत्रत्वको नहीं जानता। इसी प्रकार कान भी अपने विषयमें कुछ नहीं जानता
na veda cakṣuḥ sva-cakṣuṣṭvaṁ śrotraṁ nātmani vartate |
न वेद चक्षुश्चक्षुष्ट्वं श्रोत्रं नात्मनि वर्तते ।
भीष्य उवाच