Jarā-Mṛtyu-anatikrama: Janaka–Pañcaśikha-saṃvāda
Aging and Death Cannot Be Overstepped
विद्या प्रकृतिरव्यक्तं तत्त्वानां परमेश्वरी | विद्या ज्ञेया नरश्रेष्ठ विधिश्व॒ परम: स्मृत:,नरश्रेष्ठस अव्यक्त नामवाली जो परमेश्वरी प्रकृति है, वह सम्पूर्ण तत्त्वोंकी विद्या है। यह विद्या जानने योग्य है। इसीको ज्ञानकी परम विधि कहते हैं
vidyā prakṛtir avyaktam tattvānāṁ parameśvarī | vidyā jñeyā naraśreṣṭha vidhiś ca paramaḥ smṛtaḥ ||
वसिष्ठ उवाच—विद्या प्रकृतिरव्यक्ता तत्त्वानां परमेश्वरी। विद्या ज्ञेया नरश्रेष्ठ विधिश्चैषा परा स्मृता॥
वसिष्ठ उवाच