Śānti-parva Adhyāya 3: Karṇa’s training under Rāma Jāmadagnya and the Bhārgava restriction on the Brahmāstra
इस प्रकार श्रीमह्ाभारत शान्तिपर्वके अन्तर्गत राजधमनुशासनपर्वमें कर्णको ब्राह्मणका शापनामक दूसरा अध्याय पूरा हुआ ॥/ २ ॥। ऑपन-माज बछ। जज: > कर्णपर्वमें भी यह प्रसंग आया है, वहाँ कर्णके द्वारा बछड़ेके मारे जानेका उल्लेख है; अतः यहाँ भी होमधेनुका बछड़ा ही समझना चाहिये। तृतीयो<थध्याय: कर्णको ब्रद्यास्त्रकी प्राप्ति और परशुरामजीका शाप नारद उवाच कर्णस्य बाहुवीर्येण प्रणयेन दमेन च । तुतोष भृगुशार्दुलो गुरुशुश्रूषया तथा,नारदजी कहते हैं--राजन्! कर्णके बाहुबल, प्रेम, इन्द्रिय-संयम तथा गुरुसेवासे भुगुश्रेष्ठ परशुरामजी बहुत संतुष्ट हुए
nārada uvāca | karṇasya bāhuvīryeṇa praṇayena damena ca | tutoṣa bhṛguśārdulo guruśuśrūṣayā tathā ||
नारद उवाच—राजन्, कर्णस्य बाहुवीर्येण प्रणयेन दमेन च । गुरुशुश्रूषया चैव तुतोष भृगुनन्दनः ॥
नारद उवाच