Śoka-śamana: Kṛṣṇa’s Consolation and Nārada’s Exempla to Sṛñjaya
Chapter 29
मान्धातारं यौवनाश्वं मृतं संजय शुश्रुम । य॑ देवा मरुतो गर्भ पितु: पार््चादपाहरन्,'सूृंजय! जिन्हें मरुत् नामक देवताओंने गर्भावस्थामें पिताके पार्श्रभागको फाड़कर निकाला था, वे युवनाश्वके पुत्र मान्धाता भी मृत्युके अधीन हो गये, यह हमारे सुननेमें आया है
मान्धातारं यौवनाश्वं मृतं संजय शुश्रुम । यं देवा मरुतो गर्भे पितुः पार्श्वादपाहरन् ॥
वायुदेव उवाच