Śoka-śamana: Kṛṣṇa’s Consolation and Nārada’s Exempla to Sṛñjaya
Chapter 29
त्रयः शब्दा न जीर्यन्ते दिलीपस्य निवेशने । स्वाध्यायघोषो ज्याघोषो दीयतामिति वै त्रय:,“महाराज दिलीपके भवनमें वेदोंके स्वाध्यायका गम्भीर घोष, शूरवीरोंके धनुषकी टंकार तथा “दान दो” की पुकार--ये तीन प्रकारके शब्द कभी बंद नहीं होते थे
trayaḥ śabdā na jīryante dilīpasya niveśane | svādhyāyaghoṣo jyāghoṣo dīyatām iti vai trayaḥ ||
त्रयः शब्दा न जीर्यन्ते दिलीपस्य निवेशने । स्वाध्यायघोषो ज्याघोषो दीयतामिति वै त्रयः ॥
वायुदेव उवाच