Śoka-śamana: Kṛṣṇa’s Consolation and Nārada’s Exempla to Sṛñjaya
Chapter 29
तत्र सम सूदा: क्रोशन्ति सुमृष्टमणिकुण्डला: । सूप॑ं भूयिष्ठमश्री ध्वं नाद्य भोज्यं यथा पुरा,“वहाँ विशुद्ध मणिमय कुण्डल धारण किये रसोइये पुकार-पुकारकर कहते थे कि “आपलोग खूब दाल-भात खाइये। आजका भोजन पहले जैसा नहीं है, अर्थात् पहलेकी अपेक्षा बहुत अच्छा है”
तत्र समसूदाḥ क्रोशन्ति सुमृष्टमणिकुण्डलाḥ । सूपं भूयिष्ठमश्रीध्वं नाद्य भोज्यं यथा पुरा ॥
वायुदेव उवाच