Adhyāya 284: Tapas as a Corrective to Household Attachment
Parāśara’s Instruction
नमोस्तु कृशनासाय कृशाज्ञाय कृशाय च | संदह्ृष्टाय विहृष्ाय नम: किलकिलाय च,आपकी नासिका कृश (पतली) है, इसलिये आप कृशनस कहलाते हैं। आपके अवयव कृश होनेसे आपको कृशांग तथा शरीर दुबला होनेसे कृश कहते हैं। आप अत्यन्त हर्षोल्लाससे परिपूर्ण, विशेष हर्षका अनुभव करनेवाले और हर्षकी किल-किल ध्वनि हैं। आपको नमस्कार है
namo'stu kṛśanāsāya kṛśājñāya kṛśāya ca | sandahṛṣṭāya vihṛṣṭāya namaḥ kilakilāya ca ||
नमोऽस्तु कृशनासाय कृशाज्ञाय कृशाय च। संदहृष्टाय विहृष्टाय नमः किलकिलाय च॥
भीष्म उवाच