Adhyāya 284: Tapas as a Corrective to Household Attachment
Parāśara’s Instruction
उन्मादन शतावर्त गज्भातोयाद्रमूर्थज । चन्द्रावर्त युगावर्त मेघावर्त नमो<स्तु ते,आप जगत्को उन्माद (मोह)-में डालनेवाले हैं। आपके मस्तकपर गंगाजीकी सैकड़ों लहरें और भँवरें उठती रहती हैं। आपके केश सदा गंगाजलसे भीगे रहते हैं। आप चन्द्रमाको क्षय-वृद्धिके चक्करमें डालनेवाले हैं। आप ही युगोंकी पुनरावृत्ति करनेवाले और मेघोंके प्रवर्तक हैं। आपको नमस्कार है
unmādana-śatāvarta-gaṅgā-bhātoya-ārdra-mūrdhaja | candrāvarta-yugāvarta-meghāvarta namo 'stu te ||
भीष्म उवाच— उन्मादन शतावर्त गङ्गाभातोयाद्रमूर्धज। चन्द्रावर्त युगावर्त मेघावर्त नमोऽस्तु ते॥
भीष्म उवाच