Adhyāya 284: Tapas as a Corrective to Household Attachment
Parāśara’s Instruction
गर्भमांससूगालाय तारकाय तराय च । नमो यज्ञाय यजिने हुताय प्रहुताय च,आप फलके भीतरके गुद्देरूप मांसके प्रलोभी शृगालरूप हैं। आप ही सबको तारनेवाले तथा तरण-तारणके साधन हैं। आप ही यज्ञ और आप ही यजमान हैं। आप ही हुत (हवन) और आप ही प्रहुत (अग्नि) हैं। आपको नमस्कार है
garbhamāṃsaśṛgālāya tārakāya tarāya ca | namo yajñāya yajine hutāya prahutāya ca ||
गर्भमांसशृगालाय तारकाय तराय च । नमो यज्ञाय यजिने हुताय प्रहुताय च ॥
भीष्म उवाच