Śreyas-nirdeśa (Discerning the Superior Good): Nārada–Gālava Saṃvāda
पुष्पाणीव विचिन्वन्तमन्यत्र गतमानसम् | अनवाप्तेषु कामेषु मृत्युरभ्येति मानवम्,जैसे मनुष्य वनमें फ़ूल चुन रहा हो, उसी बीचमें कोई हिंसक जीव उसपर आक्रमण कर दे; उसी प्रकार जब मनुष्यका मन दूसरी ओर (विषयभोगोंमें) लगा होता है, उसी समय उसकी इच्छा पूर्ण होनेके पहले ही सहसा मौत आकर उसे दबोच लेती है
puṣpāṇīva vicinvantam anyatra gatamānasam | anavāpteṣu kāmeṣu mṛtyur abhyeti mānavam ||
पुष्पाणीव विचिन्वन्तमन्यत्र गतमानसम् । अनवाप्तेषु कामेषु मृत्युरभ्येति मानवम् ॥
भीष्म उवाच