मोक्षोपाय-निर्णयः
Determination of the Means to Liberation
आश्वासयद्धि: सुभृशमनुक्रोशात् तथैव च । एतत् प्रथमकल्पेन राजा कृतयुगे जयेत्,पिताजी! एक दयालु एवं विद्वान् ब्राह्मणने मुझे यह सब उपदेश दिया था। उस समय उसने कहा था कि “तात सत्यवान! मेरे पूर्वज पितामहोंने मुझे आश्वासन देते हुए अत्यन्त कृपापूर्वक ऐसी शिक्षा दी थी। इसलिये राजाको सत्ययुगमें जब कि धर्म अपने चारों चरणोंसे मौजूद रहता है, पूर्वोक्त प्रथम श्रेणीके (अहिंसामय) दण्डद्वारा ही प्रजाको वशमें करना चाहिये
āśvāsayad dhiḥ subhṛśam anukrośāt tathaiva ca | etat prathamakalpena rājā kṛtayuge jayet, pitāji |
आश्वासयद्धि सुभृशमनुक्रोशात् तथैव च । एतत् प्रथमकल्पेन राजा कृतयुगे जयेत् ॥
हुमत्सेन उवाच