तुलाधार-उपदेशः
Tulādhāra’s Instruction to Jājali on Ahiṃsā and Abhaya-dāna
ऑपन-मा_जल बछ। अकाल पजञ्चपञ्चाशदधिकद्धिशततमो< ध्याय: पज्चभूतोंके तथा मन और बुद्धिके गुणोंका विस्तृत वर्णन भीष्म उवाच भूतानां परिसंख्यानं भूय: पुत्र निशामय । द्वैषायनमुखाद् भ्रष्ट श्लाघया परयानघ,भीष्मजी कहते हैं--निष्पाप पुत्र युधिष्ठिर! द्वैपायन व्यासजीके मुखसे वर्णित जो पञ्चमहाभूतोंका निरूपण है, वह मैं पुनः तुम्हें बता रहा हूँ; तुम बड़ी स्पृहाके साथ इस विषयको सुनो इस प्रकार श्रीमहाभारत शान्तिपर्वके अन्तर्गत मौक्षधर्मपर्वमें शुकदेवका अनुप्रश्नविषयक दो सौ पचपनवाँ अध्याय पूरा हुआ ॥/ २५५ ॥। अपना बा | अप्-#-रू- षट्पज्चाशर्दाधेकद्विशततमो< ध्याय: युधिष्ठिरका मृत्युविषयक प्रश्न, नारदजीका राजा अकम्पनसे मृत्युकी उत्पत्तिका प्रसंग सुनाते हुए ब्रह्माजीकी रोषाग्निसे प्रजाके दग्ध होनेका वर्णन युधिछिर उवाच य इमे पृथिवीपाला: शेरते पृथिवीतले । पृतनामध्य एते हि गतसंज्ञा महाबला:
bhīṣma uvāca |
bhūtānāṃ parisaṅkhyānaṃ bhūyaḥ putra niśāmaya |
dvaipāyanamukhād bhraṣṭaṃ ślāghayā parayānagha ||
भीष्म उवाच । भूतानां परिसंख्यानं भूयः पुत्र निशामय । द्वैषायनमुखाद् भ्रष्टं श्लाघया परयानघ ॥
भीष्म उवाच