प्रलय-प्रक्रिया (Pralaya Process) — Guṇa-Withdrawal and Pratisaṃcara
लक्ष्मी बोली--मुझे न तो विरोचन जानता है और न उसका पुत्र यह बलि। लोग मुझे दुःसहा कहते हैं और कुछ लोग मुझे विधित्साके नामसे भी जानते हैं ।। भूतिर्लक्ष्मीति मामाहु: श्रीरित्येवें च वासव । त्वं मां शक्र न जानीषे सर्वे देवा न मां विदु:,वासव! जानकार मनुष्य मुझे भूति, लक्ष्मी और श्री भी कहते हैं। शक्र! तुम मुझे नहीं जानते तथा सम्पूर्ण देवताओंको भी मेरे विषयमें कुछ भी ज्ञान नहीं है
lakṣmī uvāca—māṃ na virocanas jānāti na ca tasya putro baliḥ | lokā māṃ duḥsahāṃ vadanti kecid vidhi-tsekā iti nāmnāpi jānanti || bhūtir lakṣmīti mām āhuḥ śrīr ity eva ca vāsava | tvaṃ māṃ śakra na jānīṣe sarve devā na māṃ viduḥ ||
भूतिरित्येव मां प्राहुर्लक्ष्मीति च तथा परे। श्रीरित्येवं च वासव त्वं मां शक्र न जानीषे सर्वे देवा न मां विदुः॥
शक्र उवाच