प्रलय-प्रक्रिया (Pralaya Process) — Guṇa-Withdrawal and Pratisaṃcara
ब्रह्मण्यो<यं पुरा भूत्वा सत्यवादी जितेन्द्रिय: । अभ्यसूयद् ब्राह्मणानामुच्छिष्ट श्षास्पृशद् घृतम्,ये पहले ब्राह्मणोंके हितैषी, सत्यवादी और जितेन्द्रिय थे; किंतु आगे चलकर ब्राह्मणोंके प्रति इनकी दोषदृष्टि हो गयी तथा इन्होंने जूठे हाथसे घी छू दिया था
ब्रह्मण्योऽयं पुरा भूत्वा सत्यवादी जितेन्द्रियः। अभ्यसूयद् ब्राह्मणानाम् उच्छिष्टहस्तः स्पृशद् घृतम्॥
शक्र उवाच