Śakra–Namuci-saṃvāda: Śoka-nivāraṇa and Daiva-vicāra
Indra and Namuci on grief, composure, and inevitability
यथार्णवगता नद्यो व्यक्तीर्जदगति नाम च | नदाश्न ता नियच्छन्ति तादृश: सत्त्वसंक्षय:,जैसे नद और नदियाँ समुद्रमें मिलकर अपने नाम और व्यक्तित्व (रूप) को त्याग देती हैं तथा जैसे बड़े-बड़े नद छोटी-छोटी नदियोंको अपनेमें विलीन कर लेते हैं, उसी प्रकार जीवात्मा परमात्मामें विलीन हो जाता है। यही मोक्ष है
yathārṇavagatā nadyo vyaktīr jaḍagati-nāma ca | nadāś ca tā niyacchanti tādṛśaḥ sattva-saṅkṣayaḥ ||
यथार्णवगता नद्यो व्यक्तीं जहति नाम च। नदाश्च ता नियच्छन्ति तादृशः सत्त्वसंक्षयः॥
भीष्म उवाच