Adhyāya 214: Tapas Redefined—Perpetual Discipline, Hospitality, and the Ethics of Eating (तपः-निरूपणम्, विघसाशी-अतिथिप्रिय-धर्मः)
तरुणाधिगतं ज्ञानं जरादुर्बलतां गतम् | विपक्वबुद्धि: कालेन आदत्ते मानसं बलम्,युवावस्थामें प्राप्त किया हुआ ज्ञान प्राय: बुढ़ापेमें क्षीण हो जाता है, परंतु परिपक्वबुद्धि मनुष्य समयानुसार ऐसा मानसिक बल प्राप्त कर लेता है, जिससे उसका ज्ञान कभी क्षीण नहीं होता
तरुणाधिगतं ज्ञानं जरादुर्बलतां गतम् । विपक्वबुद्धिः कालेन आदत्ते मानसं बलम् ॥
भीष्म उवाच