Adhyāya 166: Kṛtaghna-doṣa (कृतघ्नदोषः) — the fault of ingratitude and the limits of expiation
परिवित्ति: परिवेत्ता या चैव परिविद्यते । पाणिग्रहास्त्वधर्मेण सर्वे ते पतिता: स्मृता:,ज्येष्ठ भाईका विवाह होनेसे पहले ही यदि छोटा भाई अधर्मपूर्वक विवाह कर ले तो ज्येष्ठको “परिवित्ति” कहते हैं; छोटे भाईको “परिवेत्ता' हैं और उसकी पत्नीको जिसका परिवेदन (ग्रहण) किया जाता है, परिवेदनीया कहते हैं-ये सब-के-सब पतित माने गये हैं
parivittiḥ parivettā yā caiva parividyate | pāṇigrahās tv adharmeṇa sarve te patitāḥ smṛtāḥ ||
परिवित्तिः परिवेत्ता या चैव परिविद्यते। पाणिग्रहास्त्वधर्मेण सर्वे ते पतिताः स्मृताः॥
भीष्म उवाच