The Thirteen Inner Adversaries (Trayodaśa Doṣāḥ): Origins and Pacification
अहं तु दुर्बलो<न्ये भ्यो वृक्षेभ्यो नात्र संशय: । कि तु बुद्धा समो नास्ति मया कश्चिद् वनस्पति:,'जैसा कि नारदजीने कहा था, वायुदेव नित्य बलवान हैं। मैं तो दूसरे वृक्षोंसे भी दुर्बल हूँ, इसमें संशय नहीं है; परंतु बुद्धिमें कोई भी वृक्ष मेरे समान नहीं है
ahaṃ tu durbalo 'nye bhyo vṛkṣebhyo nātra saṃśayaḥ | kintu buddhā samo nāsti mayā kaścid vanaspatiḥ |
अहं तु दुर्बलोऽन्येभ्यो वृक्षेभ्यो नात्र संशयः । किन्तु बुद्ध्या समो नास्ति मया कश्चिद् वनस्पतिः ॥
भीष्म उवाच