Daṇḍa as the Foundation of Social Order (दण्डप्रतिष्ठा)
यज देहि प्रजां रक्ष धर्म समनुपालय । अमित्रान् जहि कौन्तेय मित्राणि परिपालय,यज्ञ कीजिये, दान दीजिये, प्रजाकी रक्षा कीजिये और धर्मका निरन्तर पालन करते रहिये। कुन्तीनन्दन! आप शत्रुओंका वध और मित्रोंका पालन कीजिये
yaja dehi prajāṁ rakṣa dharmaṁ samanupālaya | amitrān jahi kaunteya mitrāṇi paripālaya ||
यज देहि प्रजां रक्ष धर्मं समनुपालय। अमित्रान् जहि कौन्तेय मित्राणि परिपालय॥
अजुन उवाच