अबुद्धिपूर्वकपापविमोचनप्रश्नः — Janamejaya’s Unintended Transgression and the Indrota Rebuke
न सा स्त्री हाभिमन्तव्या यस्यां भर्ता न तुष्यति । तुष्टे भर्तरि नारीणां तुष्टा: स्यु: सर्वदेवता:,उस स्त्रीको स्त्री ही नहीं समझना चाहिये, जिसका पति उससे संतुष्ट नहीं रहता है। पतिके संतुष्ट रहनेसे स्त्रियोंपर सम्पूर्ण देवता संतुष्ट रहते हैं
na sā strī hābhimantavyā yasyāṃ bhartā na tuṣyati | tuṣṭe bhartari nārīṇāṃ tuṣṭāḥ syuḥ sarvadevatāḥ ||
न सा स्त्री हाभिमन्तव्या यस्यां भर्ता न तुष्यति । तुष्टे भर्तरि नारीणां तुष्टा: स्यु: सर्वदेवता: ॥
भीष्म उवाच