आपद्-राजनीतिः (Āpad-rājanīti) — Policy Options in Multi-Front Crisis
एतद् दृष्टं मया राजंस्तथा च वचन श्रुतम् | आशामपनयस्वाशु तत: कृशतरीमिमाम्,ऋषभ मुनि कहते हैं--राजन्! मैंने यह सब कुछ अपनी आँखों देखा है और मुनिका वह कथन भी अपने कानों सुना है। ऐसे ही तुम भी शरीरको अत्यन्त कृश बना देनेवाली इस मृगविषयक दुराशाको शीघ्र ही त्याग दो
etad dṛṣṭaṃ mayā rājan tathā ca vacanaṃ śrutam | āśām apanayasvāśu tataḥ kṛśatarīm imām ||
एतद् दृष्टं मया राजंस्तथा च वचनं श्रुतम् । आशामपनयस्वाशु ततः कृशतरीमिमाम् ॥
कृश उवाच