Śīla-prāpti and Śīla-lakṣaṇa (शीलप्राप्ति-शीललक्षणम्) | On the Acquisition and Marks of Character
धर्ममूल: सदैवार्थ: कामो<र्थफलमुच्यते । संकल्पमूलास्ते सर्वे संकल्पो विषयात्मक:,इनमें धर्म सदा ही अर्थकी प्राप्तिका कारण है और काम अर्थका फल कहलाता है, परंतु इन तीनोंका मूल कारण है संकल्प और संकल्प है विषयरूप
bhīṣma uvāca | dharmamūlaḥ sadaivārthaḥ kāmo 'rthaphalam ucyate | saṅkalpamūlāḥ te sarve saṅkalpo viṣayātmakaḥ ||
धर्ममूलः सदैवार्थः, कामोऽर्थफलमुच्यते। संकल्पमूलास्ते सर्वे, संकल्पो विषयात्मकः॥
भीष्म उवाच