Daṇḍotpatti-kathana (Origin and Function of Daṇḍa) — वसुहोम–मान्धातृ संवाद
- 'इमावेव गौतमभरद्वाजौ” इत्यादि श्रुतिके अनुसार सम्पूर्ण ज्ञानेन्द्रियोंका गौतम, भरद्वाज, वसिष्ठ और विश्वामित्र आदि महर्षियोंसे सम्बन्ध सूचित होता है। एकविशर्त्याधेकशततमो< ध्याय: दण्डके स्वरूप, नाम, लक्षण, प्रभाव और प्रयोगका वर्णन युधिछ्िर उवाच अयं पितामहेनोक्तो राजधर्म: सनातन: । ईश्वरश्न महादण्डो दण्डे सर्व प्रतेष्ठितम्,युधिष्ठिरने पूछा--पितामह! आपने यह सनातन राजधर्मका वर्णन किया है। इसके अनुसार महान् दण्ड ही सबका ईश्वर है, दण्डके ही आधारपर सब कुछ टिका हुआ है
Yudhiṣṭhira uvāca—ayaṃ pitāmahenokto rājadharmaḥ sanātanaḥ | īśvaraś ca mahādaṇḍo daṇḍe sarvaṃ pratiṣṭhitam ||
युधिष्ठिर उवाच— अयं पितामहेनोक्तो राजधर्मः सनातनः। ईश्वरश्च महादण्डो दण्डे सर्वं प्रतिष्ठितम्॥
युधिछ्िर उवाच