अमोघक्रोधहर्षस्य स्वयं कृत्यान्ववेक्षितु: । आत्मप्रत्ययकोशस्य वसुदैव वसुन्धरा,जिसका हर्ष और क्रोध कभी निष्फल नहीं होता, जो स्वयं ही सारे कार्योकी देखभाल करता है तथा आत्म-विश्वास ही जिसका खजाना है, उस राजाके लिये यह वसुन्धरा (पृथ्वी) ही धन देनेवाली बन जाती है
अमोघक्रोधहर्षस्य स्वयं कृत्यान्ववेक्षितुः । आत्मप्रत्ययकोशस्य वसुदैव वसुन्धरा ॥
भीष्म उवाच