Daṇḍa-svarūpa-nirūpaṇa
The Nature, Forms, and Function of Daṇḍa
दोषान् विवृणुयाच्छत्रो: परपक्षान् विधूनयेत् । काननेष्विव पुष्पाणि बहिरर्थान् समाचरन्,शत्रुके दोषोंको प्रकाशित करे और उसके पक्षके लोगोंको अपने पक्षमें आनेके लिये विचलित कर दे। जैसे लोग जंगलसे फूल चुनते हैं, उसी प्रकार राजा बाहरसे धनका संग्रह करे
भीष्म उवाच—शत्रोर्दोषान् विवृणुयात्, परपक्षान् विधूनयेत्। काननेष्विव पुष्पाणि, बहिरर्थान् समाचरन् धनं सञ्चिनुयात्।
भीष्म उवाच