Nīti-upadeśa to a Rājaputra: Self-restraint, Alliances, and Rival-Management (नीतिउपदेशः)
तेनैव त्वं धृतिमता श्रीमता चाभिसत्कृत:,आन्तरैभेंदयित्वारीन् बिल्व॑ बिल्वेन भेदय | राजा जनक बड़े धीर और श्रीसम्पन्न हैं। जब वे तुम्हारा सत्कार करेंगे, तब सभी लोगोंके विश्वास-पात्र होकर तुम अत्यन्त गौरवान्वित हो जाओगे। उस अवस्थामें तुम मित्रोंकी सेना इकट्ठी करके अच्छे मन्त्रियोंक साथ सलाह लेकर अन्तरंग व्यक्तियों-द्वारा शत्रुदलमें फूट डलवाकर बेलको बेलसे ही फोड़ो (शत्रुके सहयोगसे ही शत्रुका विध्वंस कर डालना)
tenaiva tvaṁ dhṛtimatā śrīmatā cābhisatkṛtaḥ | āntaraiḥ bhedayitvārīn bilvaṁ bilvena bhedaya ||
तेनैव त्वं धृतिमता श्रीमता चाभिसत्कृतः। आन्तरैर्भेदयित्वारीन् बिल्वं बिल्वेन भेदय॥
भीष्म उवाच