Nīti-upadeśa to a Rājaputra: Self-restraint, Alliances, and Rival-Management (नीतिउपदेशः)
अभ्युद्धरति चात्मानं॑ प्रसादयति च प्रजा: । फिर तो तुम्हें बहुत-से शुद्ध हृदयवाले, दुर्व्यसनोंसे रहित तथा उत्साही सहायक मिल जायँगे। जो मनुष्य शास्त्रके अनुकूल आचरण करता हुआ अपने मन और इन्द्रियोंको वशमें रखता है, वह अपना तो उद्धार करता ही है, प्रजाको भी प्रसन्न कर लेता है
abhyuddharati cātmānaṁ prasādayati ca prajāḥ |
भीष्म उवाच—यः शास्त्रानुगतं वर्तते मन इन्द्रियाणि च संयम्य, स आत्मानमभ्युद्धरति प्रजाश्च प्रसादयति। तस्य शुद्धहृदया निरव्यसना उत्साहिनश्च बहवः सहायाः समुपतिष्ठन्ति।
भीष्म उवाच