Kṣemadarśa–Kālakavṛkṣīya Saṃvāda: Counsel on Impermanence, Non-attachment, and Composure in Dispossession
यत् किंचिन्मन्यसे<स्तीति सर्व नास्तीति विद्धि तत् । एवं न व्यथते प्राज्ञ: कृच्छामप्यापदं गत:,तुम जिस किसी वस्तुको ऐसा मानते हो कि “यह है” वह सब पहलेसे ही समझ लो कि “नहीं है” ऐसा समझनेवाला विद्वान् पुरुष कठिन-से-कठिन विपत्तिमें पड़नेपर भी व्यथित नहीं होता
यत्किञ्चिन्मन्यसेऽस्तीति सर्वं नास्तीति विद्धि तत् । एवं न व्यथते प्राज्ञः कृच्छ्रामप्यापदं गतः ॥
भीष्म उवाच