Nakula’s Engagement with Citra-sena and Karṇa’s Sons; Śalya Re-stabilizes the Kaurava Host
राजन! खुले नेत्रोंवाले प्राणशून्य घायल मस्तकोंसे ढकी हुई पृथ्वी लाल कमलोंसे आच्छादित हुई-सी शोभा पाती थी ।। बाहुभि श्वन्दनादिग्धै: सकेयूरैर्महा धनैः । पतितैर्भाति राजेन्द्र महाशक्रध्वजैरिव,राजेन्द्र! बाजूबंद तथा दूसरे बहुमूल्य आभूषणोंसे विभूषित, चन्दनचर्चित भुजाएँ कटकर पृथ्वीपर गिरी थीं, जो महान् इन्द्रध्वजके समान जान पड़ती थीं। उनके द्वारा रणभूमिकी अपूर्व शोभा हो रही थी
bāhubhiḥ śvandanādigdhaiḥ sakeyūraiḥ mahādhanaiḥ | patitair bhāti rājendra mahāśakradhvajair iva ||
सञ्जय उवाच—राजन्, चन्दनलिप्तैः सकेयूरैर्महाधनैरन्यैश्च भूषणैर्विभूषिताः छिन्ना बाहवः पृथिव्यां पतिताः; ते राजेन्द्र महाशक्रध्वजदण्डा इव भान्ति। तैश्च रणभूमिरपूर्वशोभां लेभे—यत्र श्रीविलासचिह्नानि विनाशलक्षणानि जातानि।
संजय उवाच