Kapālamocana-tīrtha (Auśanasa) and Balarāma’s Sarasvatī Pilgrimage
अड्गुल्यग्रेण राजेन्द्र स्वड्गुष्ठस्ताडितो5भवत् । ततो भस्म क्षताद् राजन् निर्गतं हिमसंनिभम्,राजेन्द्र! मुनिश्रेष्ठ मंकणकसे ऐसा कहकर बुद्धिमान् महादेवजीने अपनी अंगुलिके अग्रभागसे अँगूठेमें घाव कर दिया। उस घावसे बर्फके समान सफेद भस्म झड़ने लगा
वैशम्पायन उवाच