अध्याय ९ — दुर्योधनस्य अन्त्यावस्था, विलापः, तथा सौप्तिक-प्रतिवृत्तम्
Duryodhana’s Final Condition, Lamentation, and the Night’s Report
कथं विवरमद्राक्षीद् भीमसेनस्तवानघ । बलिन कृतिनं नित्यं स च पापात्मवान् नृप,“निष्पाप राजसिंह! आपको समस्त धनुर्धरोंमें श्रेष्ठ कहा जाता था। आप गदायुद्धमें धनाध्यक्ष कुबेरकी समानता करनेवाले तथा साक्षात् संकर्षणके शिष्य थे तो भी भीमसेनने कैसे आपपर प्रहार करनेका अवसर पा लिया? नरेश्वर! आप तो सदासे ही बलवान् और गदायुद्धके विद्वान् रहे हैं। फिर उस पापात्माने कैसे आपको मार दिया?
sañjaya uvāca | kathaṃ vivaram adrākṣīd bhīmasenas tavānagha | balin kṛtinaṃ nityaṃ sa ca pāpātmavān nṛpa ||
कथं विवरमद्राक्षीद् भीमसेनस्तवानघ । बलिनं कृतिनं नित्यं स च पापात्मवान् नृप ॥
संजय उवाच