Aśvatthāmā’s Stuti of Rudra and Śiva’s Empowerment (सौप्तिकपर्व, अध्याय ७)
विकटा: काललम्बोष्ठा बृहच्छेफाण्डपिण्डिका: । महार्हनानामुकुटा मुण्डाश्व जटिला: परे,कितनोंके आकार बहुत विकट थे, कितनोंके काले-काले और लंबे ओठ लटक रहे थे, किन्हींके लिंग बड़े थे तो किन्हींके अण्डकोष। किन्हींके मस्तकोंपर नाना प्रकारके बहुमूल्य मुकुट शोभा पाते थे, कुछ लोग मथमुंडे थे और कुछ जटाधारी
vikaṭāḥ kālalambōṣṭhā bṛhacchephāṇḍapiṇḍikāḥ | mahārghanānāmukuṭā muṇḍāś ca jaṭilāḥ pare ||
सञ्जय उवाच—विकटाः काललम्बोष्ठा बृहच्छेफाण्डपिण्डिकाः। महार्हनानामुकुटा मुण्डाश्च जटिलाः परे॥
संजय उवाच