एवं चाधार्मिका: पापा: पठ्चाला भिन्नसेतव: । तानेवं भिन्नमर्यादान् कि भवान् न निगहति,इस प्रकार वे सब-के-सब पापी और अधार्मिक हैं। पांचालोंने भी धर्मकी मर्यादा तोड़ डाली है। इस तरह मर्यादा भंग करनेवाले उन पाण्डवों और पांचालोंकी आप निन्दा क्यों नहीं करते हैं?
evaṁ cādhārmikāḥ pāpāḥ pāñcālā bhinnasetavaḥ | tān evaṁ bhinnamaryādān kiṁ bhavān na nigṛhṇāti ||
एवं चाधार्मिकाः पापाः पाञ्चालाः भिन्नसेतवः। तान् एवं भिन्नमर्यादान् किं भवान् न निगृह्णाति॥
कृप उवाच